जाने-अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए जैन धर्मावलंबियों ने मांगी माफी

क्षमापना दिवस के साथ नौदिवसीय पर्युषण पर्व का समापन

मीडिया हाउस न्यूज एजेंन्सी बोकारो : जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज की ओर से चास के माणकचंद छल्लाणी भवन में मनाए जा रहे नौदिवसीय पर्युषण पर्वाराधना का सोमवार को समापन हो गया। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन को क्षमापना दिवस के रूप में बड़ी श्रद्धा व त्याग के साथ जैन धर्मावलंबियों ने मनाया। उन्होंने जाने-अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए छोटे-बड़े, पशु-पक्षी सहित पूरी प्रकृति से माफी मांगी। आचार्य श्री महाश्रमणजी के आध्यात्मिक निर्देशन में कोलकाता से पहुंचीं जैन उपासिका विमला मनोत एवं  सरला छाजेर के सान्निध्य में सूर्योदय के साथ ही जैन धर्मावलंबी पहुंचने लगे और वर्षभर में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से परस्पर क्षमा-याचना की। अपने सात दिनों तक त्याग, तपस्या, जप, मौन, संयम के साथ पर्युषण पर्व को आध्यात्मिक तरीके से मनाने के बाद आठवें दिन सभी जैन धर्मावलंबियों ने उपवास किया और सोमवार को क्षमापना दिवस मनाया।

क्षमा वीरों का आभूषण : इस अवसर पर उपासिका विमला मनोत ने कहा कि जैन समाज में क्षमायाचना का यह दिन बड़ा ही विलक्षण दिवस है। इस दिन वर्षों से एक दूसरे के प्रति मन में पल रही द्वेषता और कलुषता को निर्मल ह्रदय से क्षमायाचना करके धोया जाने का सार्थक प्रयास किया जाता है। व्यक्ति अगर भावों से और मन से क्षमा मांग लेता है और सामने वाला क्षमादान दे देता है तो इससे एक सुंदर व स्वस्थ समाज और राष्ट्र की परिकल्पना सार्थक होती है। क्षमा वीरों का आभूषण होता है, क्योंकि क्षमा दान विरला व्यक्ति ही कर सकता है। उपासिका श्रीमती सरला छाजेर ने कहा कि भूल होना स्वाभाविक है। क्षमापना दिवस पर व्यक्ति परस्पर क्षमा लेकर और क्षमादान देकर मैत्री भावना को विकसित कर सकता है। क्षमा आत्मशुद्धि का माध्यम है।

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जीवन में सुधार का अवसर देता है पर्युषण : उपासिका सरला छाजेर ने कहा कि पर्युषण पर्व जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को आत्मसात करने और जीवन में सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यह आठ दिवसीय पर्व जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आत्मशुद्धि, ध्यान और तपस्या का महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान समाज के लोग संयम, साधना और सत्संग का पालन करते हैं, साथ ही अपने जीवन में अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों का गहन अभ्यास करते हैं। इस वर्ष एक सितंबर को खाद्य संयम दिवस के साथ इसकी शुरुआत हुई थी। इसके बाद क्रमशः स्वाध्याय दिवस, सामयिक दिवस, वाणी-संयम दिवस, अणुव्रत-चेतना दिवस, जप दिवस, ध्यान दिवस, संवत्सरी महापर्व और क्षमापना दिवस मनाया गया। चास में पूरे आयोजन के दौरान मुख्य रूप से विनोद चोपड़ा, मदन चौरड़िया, राजेश कोठारी, अरिहंत जैन, जितोष पारख, बबीता कोठारी, कनक जैन, किरण लोधा, गौतम लोधा, अभय बागवानी, संजय बांठिया, किरण पारिख, शशि बोथरा, ललिता चोपड़ा, सुशील बैद, प्रमोद चौरड़िया, रेणु चौरड़िया, सुमन चौरड़िया आदि की सक्रिय भागीदारी रही। उक्त आशय की जानकारी जैन तेरापंथ समाज के मीडिया प्रभारी सुरेश बोथरा ने दी।

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