मांदर की थाप और करम गीतों ने वातावरण को दिया झारखंडी रंग

झारखंड सांस्कृतिक मंच ने किया करम-जावा महोत्सव का भव्य आयोजन

मीडिया हाउस न्युज एजेंसी बोकारो : झारखंड सांस्कृतिक मंच, चास-बोकारो द्वारा करम-जावा महोत्सव का समापन सह प्रतिभागियों का सम्मान समारोह रविवार को दीपांजलि पैलेस में आयोजित किया गया। यह आयोजन मंच के संस्थापक सह मुख्य संरक्षक राजदेव माहथा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। आयोजन की शुरूआत झारखंड सांस्कृतिक मंच के संस्थापक स्व. राजेन्द्र महतो के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया.कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद ढुलु महतो की पत्नी सावित्री देवी और विशिष्ट अतिथि परिन्दा सिंह रहीं। दोनों का पारंपरिक लोटा-पानी से स्वागत किया गया तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।इस सांस्कृतिक महोत्सव में बोकारो चास व चंदनकियारी प्रखंडों के बिभिन्न गांवों से 20 से अधिक टीमों ने भाग लिया। पिण्ड्राजोरा, मामरकुदर, कालापत्थर, रानीपोखर, सोनाबाद एवं झोपड़ों में आयोजित प्रारंभिक चरणों के बाद, बुधवार को सेक्टर मैदान में ऐतिहासिक सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन हुआ। मांदर की थाप और करम गीतों ने पूरे वातावरण को झारखंडी रंग में रंग दिया। मुख्य अतिथि सावित्री देवी ने कहा कि करम परब झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान है। इसकी विरासत को बचाने और संजोने में झारखंड सांस्कृतिक मंच का योगदान सराहनीय है।विशिष्ट अतिथि परिन्दा सिंह ने भी मंच के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और धरोहर से जोड़ा जा सकता है। झारखंड के मूलवासी-आदिवासी समाज ने सामूहिक जीवनशैली और आखड़ा की परंपरा से अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। मांदर, ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए लोग अपनी मां, माटी, मानुष और मातृभाषा के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। करम-जावा भाई-बहनों के अटूट प्रेम और सामाजिक बंधन का प्रतीक है।उन्होंने आगे कहा कि झारखंड सांस्कृतिक मंच का संकल्प है कि पूरे बोकारो जिले को छह जोनों में बांटकर सांस्कृतिक जागरण का मशाल जलाया जाए। इसी कोशिश के तहत यह आयोजन किया गया, जिसमें 20 टीमों की भागीदारी ने जिले में सांस्कृतिक चेतना की नई लहर उत्पन्न की है। इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष बिक्रम महतो, कवि नागेश्वर महतो, वरीय उपाध्यक्ष हाबुलाल गोरांई, भागीरथ शर्मा, पार्वत
चरण महतो, ज्योतिलाल महतो, राजकिशोर महतो, महासचिव संतोष कुमार सिंह, सुनिल महतो, निर्णायक मंडली – खिरोधर महतो, शांति भारत, लाल देव गोप, मनोज गोप, प्राचार्य श्रवण कुमार। खगेन्द्र नाथ वर्मा के अलावे आताउद्दीन अंसारी, आशीष कुमार महतो, परमेश्वर मण्डल, रामपद महतो,दिगम्बर महतो, चंडी चरण झा, पंचानन महतो, सुदर्शन सिंह,
आमिर शेख, संजय लाल महतो, सिराजुद्दीन अंसारी, बिनोद कुमार, गोलबाबू अंसारी,सीताराम गोप, गोपाल शाह, शिव शंकर रॉय, जवाहर लाल चौधरी, सपन गोप, अनूप पाण्डे, सविता गोप, फेकनी देवी, कल्याणी देवी, मंजू देवी, चंपा देवी, रेणुका देवी, चंदनादेवी, खेदन राय, रेश्मा देवी, भुवनचंद्र दास सहित हजारों की संख्या में संस्कृति एवं प्रकृति प्रेमी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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