शहीद आईआरबी जवान के पिता का छलका दर्द कहा : देश के जवान के लिए कोई संवेदना नहीं, संवेदना अपनी राजनीतिक देखकर आती है।
वैश्य समाज ने खोला मोर्चा,जनता को गुमराह कर सेंक रहे लोग राजनीतिक रोटियां
मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी बोकारो : बोकारो में जयंत सिंह की हत्या के बाद हत्या के एक आरोपी के खिलाफ सेक्टर 6 स्थित अतिक्रमित ढांचे को गिराने को लेकर लगातार आक्रोश धरना जुलूस प्रदर्शन और आंदोलन चलाया जा रहा है। इस बीच पिछले छठ के समय में हुई आईआरबी के जवान की हुई चास में हत्या का मामला भी सुलग गया है। इस मामले में भी आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा है लेकिन आरोपियों के ढांचे को गिराने का प्रशासन द्वारा दिया गया वायदा पूरा नहीं होने पर इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू हो गई है। अपने को पिछड़े समाज से आने की बात कह कर एक्शन नहीं होने का आरोप जड़ते हुए प्रशासन के कार्यकाल पर सवाल उठाया गया हैं। आईआरबी जवान के पिता लक्ष्मी यादव अपना दर्द बयां करते हुए सिहर उठते हैं उनकी आंखें डबडबा जाती है। बोकारो में चास के यदुवंश नगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वह अपने जख्म दर्द को बयां करते हैं। और जयंत सिंह हत्याकांड के बाद हो रही राजनीतिक की कड़ी निंदा भी की है। उन्होंने कहा कि मैं एक पिता के रूप में नहीं बलिक एक नागरिक के रूप में यह सवाल उठाने को मजबूर हूं की क्या इस देश में पिछड़े समाज के बेटे की सुनवाई नहीं होती है जब देश का जवान के लिए कोई संवेदना नहीं है और उनकी संवेदना अपनी राजनीतिक देखकर आती है जो उस समय पूरी तरह मौन थे अब एक घोषित अपराधी की मौत पर सड़क पर उतर आए है धरना प्रदर्शन कर रहे है और उसे शहीद बताकर राजनीतिक कर जनता को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं और खुद को समाज का ठेकेदार साबित करने की कोशिश कर रहे है। हरला थाना में आर्म्स एक्ट के तहत जयंत सिंह ,शशि भूषण सिंह उर्फ मुन्ना सिंह दोनों जेल जा चुके हैं। मुन्ना सिंह के खिलाफ माराफारी और हरला थाना में पांच अपराधिक मामले दर्ज है जो जेल में सजा काट रहा है। लक्ष्मी यादव ने कहा कि यह जन आंदोलन नहीं है यह व्यक्ति विशेष की राजनीतिक है जब देश का जवान मारा गया तब यही लोग मौन थे और आज वह एक अपराधी की मौत पर आंदोलन कर रहे हैं। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए और मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मुझे न्यायालय और कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा है अगर कोई दोषी है तो सजा अदालत तय करेगी। लेकिन कानून सबके लिए समान रूप से लागू होना चाहिए। लक्ष्मी यादव की माने तो उन्होंने साफ कहा की जरूरत पड़ी तो हम सभी सड़क पर उतरकर आंदोलन भी करने को मजबुर होंगे। इस दौरान पिछड़े और वैश्य समाज से जुड़े लोग भी जयंत हत्याकांड की निंदा करते हुए कहा कि इस कांड में आरोपियों को जो भी सजा होगी कोर्ट पर विश्वास रखते हैं। बोकारो एक शांत जिला रहा है और अपराध की दृष्टि से बोकारो कभी भी चर्चा में नहीं रहा है क्योंकि यहां के शांतिप्रिय लोग अपनी रोजी-रोटी कमाने और जिंदगी को शांति से गुजारने में विश्वास करते रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में जिस तरीके से अपराध हुए अपराध को लेकर लोगों के तेवर दिखे और फिर आंदोलन का दौर शुरू हुआ उससे कानून व्यवस्था पर सवाल भी उठा और अपराध को लेकर शांत समझा जाने वाला बोकारो जिला सुर्खियों में भी रहा। अपराधियों से निपटने में कानून को कोई कोताही नहीं बरतना चाहिए, यह आम लोग चाहते हैं। और सब चाहते हैं कि बोकारो में अमन चैन कायम रहे कानून का शासन चलता रहे ना तो कोई दबाव हो और ना ही किसी के साथ बुरा बर्ताव हो। शांति कायम रहे लोगों की जिंदगी शांति के साथ पटरी पर चलती रहे सब की कामना है और जब कोई अपराध हो तो अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाए।










