ओबरा तापीय परियोजना में मजदूरों का बकाया वेतन मामला लंबित, चार माह बाद भी नहीं हुई सुनवाई

मीडिया हाउसओबरा, सोनभद्र – ओबरा तापीय विद्युत परियोजना से जुड़े ठेका श्रमिकों का वेतन भुगतान प्रकरण पिछले चार महीनों से लंबित है, जिससे प्रभावित मजदूरों में असंतोष और आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है। मामला उप श्रम आयुक्त, पिपरी-सोनभद्र के समक्ष Payment of Wages Act, 1936 के अंतर्गत विचाराधीन है, जिसमें श्रमिकों द्वारा आरोप लगाया गया है कि मयंक इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अगस्त 2025 से नवंबर 2025 तक की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।

श्रमिकों का कहना है कि वे प्रतिदिन लगभग 12 घंटे कार्य करने के बावजूद न केवल वेतन से वंचित रखे गए, बल्कि उनके वेतन से नियमित रूप से भविष्य निधि (PF) की कटौती भी की गई, परंतु उन्हें न तो पीएफ पहचान संख्या उपलब्ध कराई गई और न ही जमा राशि का कोई विवरण दिया गया। इस संबंध में श्रमिकों द्वारा कई बार विभागीय स्तर पर शिकायत की गई, जिसके बाद मामला न्यायालय प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत हुआ और नोटिस जारी किया गया। नोटिस के अनुसार संबंधित पक्षों को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि, श्रमिकों का आरोप है कि नोटिस जारी होने के लगभग चार महीने बाद भी मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। वहीं, श्रमिकों के अधिवक्ता द्वारा भी मामले की स्पष्ट स्थिति साझा न किए जाने से मजदूरों में भ्रम और निराशा की स्थिति बनी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में समय पर वेतन भुगतान न करना श्रम कानूनों का गंभीर उल्लंघन है और प्रकरणों का निस्तारण यथाशीघ्र किया जाना अपेक्षित होता है, ताकि श्रमिकों को आर्थिक राहत मिल सके। स्थानीय स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि श्रम विभाग इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर लंबित प्रकरण का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करे और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए।

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