महिला सशक्तिकरण का सशक्त मॉडल बना विद्युत सखी अभियान-उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य

रौनियार समाज-सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित हेमू का विजय दिवस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। डा ए के गुप्ता (रौनियार) प्रदेश अध्यक्ष

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी लखनऊ-उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की दीदियाँ आज विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से न केवल अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की दिशा में उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य के गतिशील नेतृत्व के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। विद्युत बिल कलेक्शन में दीदियों की सक्रिय भागीदारी और उससे अर्जित आय में निरंतर वृद्धि को विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के प्रधानमंत्री के विजन को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस कार्यक्रम से महिलाओं की आमदनी में वृद्धि तो हो ही रही है, साथ ही समाज में उनका मान-सम्मान और प्रतिष्ठा भी निरंतर बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन तथा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मध्य हुए अभिसरण के परिणामस्वरूप संचालित विद्युत सखी कार्यक्रम आज ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व में परिवर्तन की एक सफल और प्रेरक कहानी बन चुका है। यह पहल जहां एक ओर बिजली बिल संग्रह प्रणाली को सुदृढ़ कर रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आय का सशक्त माध्यम भी बनी है।

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मिशन निदेशक, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, अरुण कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक विद्युत सखियों द्वारा रू 3,650 करोड़ से अधिक का बिजली बिल संग्रह करते हुए रू 46.98 करोड़ से अधिक का कमीशन अर्जित किया गया है। प्रदेश में 16,144 सक्रिय विद्युत सखियाँ फील्ड में कार्यरत हैं, जो ग्रामीण उपभोक्ताओं तक अंतिम छोर तक सेवाएँ पहुँचा रही हैं।
जिला स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन सामने आया है। सहारनपुर, सुल्तानपुर, मेरठ और अमेठी जैसे जिलों ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।

प्रदेश की 70 विद्युत सखियों ने ओटीएस स्कीम के अंतर्गत रू 1 करोड़/विद्युत् सखी से अधिक ( 70 विद्युत सखियो ने 70 करोड़ से अधिक) का बिल संग्रह कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इनमें सोनी द्विवेदी (अमेठी) द्वारा रू 3.1 करोड़, मेहर जहाँ (रामपुर) द्वारा रू 2.7 करोड़ तथा राजश्री शुक्ला (बाराबंकी) द्वारा रू 2.3 करोड़ का बिल संग्रह विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

आज विद्युत सखी कार्यक्रम केवल बिल संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, उपभोक्ताओं को घर-घर सुविधाजनक सेवा उपलब्ध कराने तथा बिजली वितरण तंत्र को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने का एक सफल मॉडल बन चुका है। यह पहल इस तथ्य को प्रमाणित करती है कि जब महिलाओं को अवसर और नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे न केवल अपने जीवन में परिवर्तन लाती हैं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बना देती हैं।

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